Thursday, August 13, 2009

किस-किस का हो वध?

सबसे पहले तो आप सभी को जन्माष्टमी की ढ़ेर सारी शुभकामनाएं...इस बार महाराष्ट्र में तो स्वाइन फ्लू ने इस त्योहार का रंग फीका कर दिया, लेकिन बाक़ी जगह सबकुछ हर साल की ही तरह होगा। कुछ मंदिरों में झांकी भी लगाई गई है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण को कंस की जगह स्वाइन फ्लू का वध करते दिखाया गया है। एक चैनल पर चल भी रहा था..इस राक्षस का वध करो...दिल में एक सवाल उठा..किस-किस का वध करेंगे भगवान..यहां तो राक्षसों की पूरी फौज़ तैनात है। सीरियल में दिखा था..भयानक दिखने वाले राक्षस-राक्षसी तरह-तरह के वेश में आते थे और कृष्ण उन्हें मारकर उनका उद्धार करते थे। लेकिन, अब तो इन राक्षसों को पहचानना भी मुश्किल है। कोई ऑटो चालक के वेश में आता है, महिला सवारियां बैठाता है और बलात्कार के बाद सारा सामान लूटकर फरार हो जाता है। कोई गैस सिलेंडर चेक करने वाला बनकर आता है, घर का सारा माल समेटता है और घर में मौजूद लोगों को ज़ख्मी करके चलते बनता है। कोई नौकर के वेश में होता है, खाता है-पीता है, तनख्वाह लेता है और मौका मिलने पर घर में मौजूद लोगों की जान लेकर सामान बटोर लेता है। इनसे भी बच गए तो उनसे कैसे बचेंगे, जो अपने बनकर आते हैं और दुश्मनों को मात कर जाते हैं। हाल ही में दिल्ली में एक ऐसा ही वाकया सामने आया। एक बुजुर्ग ने फिरौती के लिए अपने ही नाती को अगवा कर लिया। और बच्चे के मामा ने इसमें अपने पिता का साथ दिया था। यानी नाना और मामा भेष बदलकर अगवा करने वाले राक्षस बन गए। अब बेचारा बच्चा कृष्ण तो था नहीं और ना ही ये सतयुग ही था...फिर भी बच गया तो इसे कृष्णलीला ही मानिए क्योंकि दिल्ली में ही दोस्तों ने जिस तरह रिभु को अगवा भी किया, उसके घरवालों से लाखों की फिरौती भी वसूली और फिर मारकर भी फेंक दिया..उससे तो इन राक्षसों से रहम की उम्मीद भी नहीं कर सकते। हां, एक अच्छी ख़बर जन्माष्टमी से ठीक दो दिन पहले ज़रूर आई, जब बिहार की एक अदालत ने एक पूर्व मंत्री बृजबिहारी प्रसाद की हत्या के ग्यारह साल बाद कई बाहुबलियों को कानून की ताकत दिखा दी। सूरजभान, राजन तिवारी, मुन्ना शुक्ला जैसे बाहुबलियों को उम्र कैद की सज़ा सुनाई गई है। वैसे बृजबिहारी भी दूध के धुले नहीं थे। दुबे हत्याकांड में उनका ही हाथ था और मज़ेदार बात तो ये है कि जिस दुबे को मारने में बृजबिहारी का हाथ था, वो भी गैंगस्टरों के सरगना बताए जाते हैं..राजनीति के राक्षसों में उनका भी नाम शुमार है। खैर...भगवान वध करें, इस जन्माष्टमी पर...भ्रष्टाचार के राक्षस का, महंगाई के राक्षस का, मंदी के राक्षस का..इनसानों के भेष में छिपे हर राक्षस का और हां स्वाइन फ्लू के राक्षस का भी...
बहुत-बहुत बधाई
आपका
परम

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