Tuesday, January 6, 2009

..कुछ भी ठीक नहीं

नोएडा में एक छात्रा के साथ गैंग रेप हुआ। क्रिकेट खेलकर लौट रहे कुछ लड़कों ने मॉल के सामने से छात्रा को अगवा किया और हैवानों को शायद जीती-जागती लड़की भी बैट और बॉल की तरह ही खेलने का सामान नज़र आई। वैसे बलात्कार की घटनाएं किसी को अब नहीं चौंकातीं। आदी हो चुके हैं हम सब सुन सुनकर..चलती कार में बलात्कार, घर में बलात्कार.. बहस भी बहुत हो चुकी..बलात्कारी को सख्त सज़ा मिलने से लेकर फांसी दिए जाने तक...और नतीजा भी हम देख रहे हैं, कुछ होना-जाना नहीं.. बिगड़ैल रइसजादों को नोटों की गड्डी और कार संस्कार में देने वाले मां-बाप को पता नहीं अपनी औलाद की ये कारगुजारियां कैसी लगती होंगी? सड़क किनारे कार खड़ी कर पानी की तरह शराब पीकर देर रात घर लौटने वाले अपने बच्चों से क्या सवाल करते होंगे ये लोग, ये भी भगवान जानें.. खैर..अब तो इन बातों पर न लिखने को जी चाहता है, न ही बात करने का..क्योंकि सिर्फ लिखने-बोलने से कुछ होना-जाना नहीं है। चलिए, दूसरी बात करते हैं...
मेरा मन इन दिनों कुछ उदास है,
हर वक्त ये किसी को ढूंढता आसपास है..
इस बात से बेख़बर कि
जो खो गया, अब बेकार, उसकी तलाश है।
पिछले कुछ वक्त से मैं इस ब्लॉग को वक्त नहीं दे पा रहा हूं। कुछ व्यक्तिगत परेशानियां भी हैं, कुछ जिम्मेदारियां भी हैं, जिनको निभानी है। अगले एक हफ्ते तक शायद आपसे संपर्क नहीं हो पाए, लेकिन उम्मीद है, अगले हफ्ते जब ब्लॉग पर लौटूंगा, आपका वही प्यार, वही साथ मिलेगा।
आपका
परम

1 comment:

Unknown said...

मैंने भी न्यूज़ देखा था..मन व्यथित हो उठा...ऐसे लोगो को सरे आम फांसी दे देनी चाहिए | ऐसे दरिंदो का समाज में कोई जगह नही है ..........